फिल्म ‘बदलापुर बॉयज़’ एक छोटे से गांव की कबड्डी टीम के संघर्ष पर आधारित है. यह फिल्म 2009 की तमिल हिट फिल्म 'वेन्निला कबड्डी कुज़ू' की रीमेक है. इस फिल्म का विषय काफी अच्छा है जिसकी तारीफ करना लाज़मी है. कबड्डी जैसे भारतीय और बिना ग्लैमर वाले खेल को एक फिल्म का सब्जेक्ट बनाया गया जो कि काबिल-ए-तारीफ है. जिस दौर में बड़े स्टार्स अपनी खराब मसाला फिल्मों को हर जगह प्रमोट करके करोड़ों की ओपनिंग कर लेते हैं तो उसी दौर में सीमित साधनों, छोटी स्टारकास्ट और कम बजट में शूट करके 'बदलापुर बॉयज' को रिलीज़ किया गया.
कहानी
फिल्म की कहानी यूपी के एक गांव बदलापुर की है. बदलापुर में सालों से सूखे की मार है और किसानों का बुरा हाल है. सालों तक कोशिश करने के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं होती तो एक किसान राम प्रवेश आत्मदाह कर लेता है लेकिन शुरुआती खबरों के बावजूद नहर की बात आगे नहीं बढ़ती. इस किसान का बेटा विजय कबड्डी का बेमिसाल खिलाड़ी होता है. शुरुआती संघर्ष के बाद उसे राष्ट्रीय कबड्डी कोच सूरजभान सिंह (अनु कपूर) की मदद मिलती है. इस गांव की टीम राज्य स्तर के टूर्नामेंट में दाखिल होती है. फिर आखिर तक आते-आते इस टीम को क्या-क्या कुर्बानी देनी पड़ती है और क्या इनकी मेहनत रंग लाती है? यह सब देखने के लिए आपको सिनेमाघर का रुख करना पड़ेगा.
अभिनय
अन्नू कपूर ने इसमें कबड्डी कोच की भूमिका निभाई है. उन्होंने अपनी भूमिका के साथ पूरी तरह से न्याय किया है. अन्नु के अलावा निशान सरन्या मोहन, शंशाक उदापुरकर, पूजा गुप्ता, अनुपम मानव, किशोरी शहाने, मजहर खान, अंकित शर्मा, विनित और अमन वर्मा जैसे नए चेहरों ने अपने अभिनय से सबको काफी प्रभावित किया है और उनका अभिनय बेहद ही सराहनीय है.
निर्देशन
फिल्म की कहानी 'लगान', 'चक दे' या 'मैरी कॉम' जैसी कई स्पोर्ट्स फिल्मों जैसी ही है. फिल्म के निर्देशक शैलेश वर्मा की यह पहली फिल्म है. इससे पहले वह सलमान खान की फ्लॉप फिल्म 'वीर' की कहानी लिख चुके हैं. तमिल फिल्म सामने होने के बावजूद शैलेश ने इसकी कहानी को उलझा दिया है. अच्छी शुरुआत के बाद कबड्डी के असली विषय पर आने में यह फिल्म बहुत समय लेती है. बेहिसाब भटकती कहानी में समझ ही नहीं आता कि यह सामाजिक फिल्म है, लवस्टोरी या स्पोर्ट्स फिल्म है.

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