हिन्दी फिल्म जगत में ट्रैजडी किंग के नाम से मशहूर दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार का आज जन्मदिन है और वह 92 साल के हो गए हैं. दिलीप का जन्म 11 दिसंबर 1922 को पेशावर में हुआ था जो कि अब पाकिस्तान में है. दिलीप के बचपन का नाम मोहम्मद यूसुफ खान था.
1930 में दिलीप का परिवार मुंबई आ गया और 1940 में दिलीप पुणे चले गए. पुणे में वह एक कैंटीन मालिक थे और वह फलों का व्यापार भी करते थे. दिलीप भारतीय सिनेमा के सबसे सफल अभिनेताओं में से एक हैं. उन्होंने 1994 में आई फिल्म 'ज्वार-भाटा' से बॉलीवुड में कदम रखा लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ कमाल नहीं कर पाई थी. इस फिल्म के बाद इसके लेखक ने उनका नाम यूसुफ खान से दिलीप कुमार रख दिया और इसके बाद उन्हें इसी नाम से पहचाना जाने लगा.
1947 में आई उनकी दूसरी फिल्म 'जुगनू' दिलीप कुमार की पहली हिट फिल्म साबित हुई और इसने उन्हें बेशुमार शोहरत दिलाई. इसके बाद उन्होंने 'साहेब', 'अंदाज', 'जोगन', 'दीदार', 'दाग', 'देवदास', 'यहूदी' और 'मधुमती' जैसी कई हिट फिल्में दी. दिलीप ने 1952 में आई फिल्म 'दाग' के लिए पहला फिल्म फेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड जीता और फिर उन्होंने 1955 में आई फिल्म 'देवदास' के लिए भी यह अवॉर्ड जीता. लगातार दो बार अवॉर्ड जीतने वाले वह पहले एक्टर बने.
दिलीप ने अपने दौर की सभी मशहूर फिल्म अभिनेत्रियों के साथ काम किया जिसमें से नरगिस, कामिनी कौशल, मीना कुमारी, मधुबाला और वैजयंती माला जैसी अभिनेत्रियां शामिल हैं. दिलीप कुमार ने अपनी छवि 'ट्रेजडी किंग' को हटाने के लिए अपने पारिवारिक डॉक्टर की सलाह पर साफ-सुथरी छवि वाली फिल्म ‘आन’ में काम किया जिसमें उन्होंने एक आक्रामक किसान का रोल निभाया था और यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर काफी हिट रही.
इसके बाद दिलीप ने 'अंदाज', 'नया दौर' और 'कोहिनूर' जैसी फिल्मों में मुख्य भूमिका में काम किया. 'कोहिनूर' के लिए दिलीप कुमार ने एक बार फिर फिल्म फेयर बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड जीता. इसके बाद उन्होंने 1960 में आई के. आसिफ की बड़े बजट की ऐतिहासिक फिल्म 'मुगल-ए-आजम' में राजकुमार सलीम का किरदार निभाया जो कि काफी सफल रही. हर कामयाब फिल्म के साथ इंडस्ट्री में उनका नाम बढ़ता चला गया.

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