तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के परिजनों को मोदी सरकार ने 5-5 लाख रुपए का मुआवजा देने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है. पीएम नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय कैबिनेट की एक बैठक में यह फैसला लिया गया है.
आपको बता दें कि 1984 सिख विरोधी दंगे को लेकर राजनीति कोई नई बात नहीं है. समय-समय पर दंगे को लेकर राजनीतिक रोटियां सेकी गई हैं लेकिन 30 साल बीत जाने पर भी पीड़ितों को न तो मुक्ममल इंसाफ मिल पाया है और न ही मुआवजा. आज भी बहुत से पीड़ित हैं, जो मुआवजा पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. उस पर मुआवजे को हड़पने वाले भी पीछे नहीं.
एक समाचार चैनल का दावा है कि दिल्ली पुलिस ने फर्जी कागजात तैयार कर पीड़ितों का मुआवजा हड़पने की कोशिश की. इस मामले की जांच का जिम्मा पीएमओ के दखल के बाद दिल्ली पुलिस की एंटी रायट सेल को सौंपा गया था. गौरतलब है कि संख दंगे में करीब 3300 लोग मारे गए जबकि 2400 लोगों के परिवारों को मुआवजा मिला है पुलिस ने मामले में 254 एफआईआर दर्ज की थी, जिनमें से छह लोगों को सजा हो पाई है.
आधिकारिक सूत्रों से पता चला है कि सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के परिवारों को दिया जानेवाला यह मुआवजा सरकार और विभिन्न एजैंसियों से अबतक मिले मुआवजे के अतिरिक्त होगा. दंगे में दिल्ली में ही 2733 लोग मारे गए था. बाकी के लोग उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में मारे गए. पिछले 3 महीनों के दौरान मोदी सरकार को विभिन्न सिख संगठनों से अनेक याचिकाएं मिली थीं जिसके कारण मुआवजा देने का प्रस्ताव स्वीकार किया गया है.
गौरतलब है कि 2006 में डा. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यू.पी.ए. सरकार ने सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए 717 करोड़ रुपए के एक पैकेज की घोषणा की थी जिसमें दंगे में मारे गए लोगों के परिवार को 3.5-3.5 लाख रुपए के मुआवजे के साथ ही घायलों और संपत्ति का नुक्सान उठाने वाले लोगों के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया था.

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