Monday, January 26, 2015

राज का स्वतंत्रा दिवस से गणतंत्र दिवस तक का सफर

महाराष्ट्र के गोरेगांव के एक इंटिरियर डिजाइनर को तकरीबन एक दशक पहले मैराथन दौड़ने का शौक चढ़ा और यह शौक कब जुनून में बदल गया इसका उसे भी पता नहीं चला. बचपन में कुंग-फू में कई उपलब्धियां हासिल करनेवाले राज वडगामा ने कई महीनों के सोच-विचार के बाद 'भारथॉन-10,000' का खाका तैयार किया. 47 साल के राज ने पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर मुंबई से भारथॉन की शुरुआत की और आज गणतंत्र दिवस पर उनके इस अभियान का समापन गेटवे ऑफ इंडिया पर हुआ.
भारथॉन के दौरान 17 राज्यों, 70 शहरों और अनगिनत गांवों से गुजरे राज ने बताया कि बिहार का किशनंगज हो या फिर सुदूर चेन्नै का एक छोटा-सा गांव, लोगों ने उन्हें इतना प्यार दिया कि वह इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकते. उनको अनजाने लोगों ने खाना खिलाया, उनके साथ दौड़े और दुर्लभ जगहों पर पानी का इंतजाम किया. यहां तक कि जब वह यूपी के रामपुर में बीमार पड़ गए तो वहां उनकी मदद के लिए भी लोग आगे आए.
15 अगस्त से 26 जनवरी के बीच देश के 10,000 किलोमीटर नापने वाले राज का अनुभव है कि शहरों में हम बैठकर जो भी बात करें लेकिन वास्तविकता यही है कि हर जगह लोगों का सपना शांति के साथ रहना और प्रगति की राह पर बढ़ना है.
रिकॉर्ड टूटा
राज का मकसद चार महीने में 10,000 किलोमीटर दौड़कर रिकॉर्ड बनाने का था लेकिन तबीयत खराब होने की वजह से वह ऐसा नहीं कर पाए. रिकॉर्ड बनाने के लिए उन्हें हर दिन औसतन 83 किलोमीटर दौड़ना था. उनके इस अभियान में एक कॉर्डियोलॉजिस्ट और एक फिजियोथेरपिस्ट ने साथ निभाया. उन्होंने औसतन रोज 60 किलोमीटर की दौड़ लगाई.

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